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भगवान भरोसे प्रधानपाठ: बैराज के नीचे से भी रिस रहा पानी, उखड़े फ्लोर को मरम्मत करने में भी हो रही परेशानी

By January 31, 2019 937 0

नियाव@खैरागढ़

प्रधानपाठ बैराज निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की एक और बड़ी कड़ी पकड़ में आई जब ठेकेदार के कर्मचारी उखड़े फ्लोर की रिपेयरिंग के लिए मौके पर पहुंचे। पता चला कि पूरे स्ट्रक्चर के नीचे से ही पानी रिस रहा है। इसी वजह से उखड़ी फ्लोरिंग को सुधारने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही। पंप लगाकर पानी बाहर निकालने के बावजूद वह सूख नहीं रहा। ठकेदार के कर्मचारी पिछले एक माह से डेरा जमाए मटेरियल का इंतजार कर रहे हैं।


आमनेर नदी में बहे कांक्रीट के टुकड़ों की पतली छड़ों से निर्माण में हुआ भ्रष्टाचार पहले ही उजागर हो चुका है। अब मिलीभगत कर की गई गड़बड़ी खुद ठेकेदार के लिए सिर दर्द साबित हो रही है। उखड़े फ्लोर के नीचे से रिस रहा पानी पंप लगाने के बावजूद सूख ही नहीं रहा। इसके चलते चलते रिपेयरिंग का काम भी नहीं हो पा रहा है। मौके पर सिर्फ सीमेंट की बोरियां भी रखी हैं। गिट्‌टी, रेत और छड़ जैसे मटेरियल पहुंचाए ही नहीं गए हैं। ठेकेदार के कर्मचारी भी इसी का इंतजार कर रहे हैं। बताया गया कि पंप चलाने के लिए बिजली नहीं मिल रही, इसलिए डीजल पंप से काम चलाना पड़ रहा है।


धंस चुका है 44 करोड़ का पूरा स्ट्रक्चर / निर्माण में गड़बड़ी इस कदर हुई कि प्रधानपाठ मंदिर की तरफ का हिस्सा धंस चुका है। स्टीलिंग बेसिन खोखला हो गया है। विंग वाल से पानी की धार निकलने लगी। चारों गेट पहले से ही लीक थे। अब नीचे से पानी रिसने से आशंका है कि 44 करोड़ का पूरा स्ट्रक्चर ही धंस चुका है।


सात माह बाद भी शुरू नहीं हो सका काम / बारिश के बाद बैराज का फ्लोर उखड़े तकरीबन सात महीने हो चुके हैं। इसके बावजूद रिपेयरिंग का काम शुरू नहीं हो सका है। अब नई परेशानी सामने आने के बाद आशंका जताई जा रही है कि मरम्मत होने के बाद भी बैराज की मजबूती शशंकित रहेगी।


11 साल में 59 करोड़ हुई प्रोजेक्ट की लागत / कुल 11 साल में प्रधानपाठ प्रोजेक्ट की लागत 18 करोड़ 87 लाख से बढ़कर 59 करोड़ पहुंच गया, लेकिन निर्माण की क्वालिटी घटिया ही रही। स्लूज गेट से लेकर गेंट्री क्रेन तक सबकुछ काम चलाऊ लगाया गया। सिविल वालों से मैकेनिकल वर्क कराने के कारण भी ये गड़बड़ी हुई।


पूरा भरा बैराज तो हो सकता है बड़ा नुकसान / इंजीनियर बता रहे हैं कि बैराज की भराव क्षमता 3.4484 मिक्यूमी है। अगर इतना भी भरा तो मुसीबत हो जाएगी। इसलिए जून में महाराष्ट्र की तरफ से बारिश का पानी आते ही चारों गेट खोल दिए गए थे। इसके बाद भी कई बार गेट खोले गए। बैराज को पूरा नहीं भरने दिया गया।


भ्रष्टाचार की जांच करने से कतरा रहे अफसर / विधायक देवव्रत सिंह बैराज की मजबूती पर सवाल उठा चुके हैं। खुद कलेक्टर भीम सिंह ने जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। पीएम-सीएम तक शिकायत हो गई, लेकिन इतने बड़े भ्रष्टाचार को लेकर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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Last modified on Thursday, 09 January 2020 12:07
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