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खैरा से खैरागढ़ (Khairagarh) तक बहेगी निर्मल धार, शिवालयों में नर्मदा (Narmada) जल चढ़ाकर रोपे जाएंगे पौधे Featured

लालपुर मुक्तिधाम में श्रमदान करते निर्मल त्रिवेणी महाभियान के सदस्य। लालपुर मुक्तिधाम में श्रमदान करते निर्मल त्रिवेणी महाभियान के सदस्य।

महाभियान का अगला कदम: आज चकनार के कुंड में चलेगा सफाई अभियान, कल जल लेने जाएंगे निर्मल त्रिवेणी महाभियान (Nirmal Triveni Mahabhiyan Khairagarh) के सदस्य।



खैरागढ़. श्री रुक्खड़ स्वामी मंदिर सहित नगर के शिवालयों में चकनार के नर्मदा कुंड का चल चढ़ेगा। फिर मंदिर-मस्जिद सहित विभिन्न मुक्तिधामों व कब्रिस्तानों में पौधरोपण की शुरुआत होगी। इससे पहले रविवार को निर्मल त्रिवेणी महाभियान से जुड़े सदस्य चकनार जाकर कुंड की सफाई करेंगे। इसमें वहां के युवा भी शामिल होंगे। फिर दूसरे दिन सोमवार वहीं का जल लाकर पौधरोपण अभियान का श्रीगणेश किया जाएगा। यानी अब नर्मदा कुंड के जल से पूरी 'निर्मल त्रिवेणी' सींची जाएगी। Also read: Corona V/S Creators: खैरागढ़ में Corona Worriers रोपेंगे पौधे, बनेगा स्मृति वन

 

श्री रुक्खड़ स्वामी मंदिर और नर्मदा (Narmada) कुंड की किवदंतियों के मद्देनजर महाभियान की टीम ने ये फैसला लिया है। सोमवार को जल चढ़ाने के साथ ही अभियान के श्रमदानी नगर के सभी मंदिरों में फलदार, छायादार और फूलों के पौधे लगाएंगे। इसमें अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल शामिल रहेंगे। जहां धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौधारोपण किया जाएगा। मंदिरों व अन्य धार्मिक स्थलों में पौधारोपण के बाद मुक्तिधाम, कब्रिस्तान जैसे स्थलों पर पूर्वजों की स्मृति में पौधा रोपण किया जाएगा। इस तरह से विधिवत पौधारोपण का आगाज़ होगा । Also read:  Khairagarh में लाखों की ठगी: नपा के नेता प्रतिपक्ष कोठले (Kothale) सहित चार गिरफ्तार, तीन फरार, थाना घेरने पहुंचे भाजपाई ...

खैरा से जुड़े हैं खैरागढ़ (Khairagarh) के तार



किवदंती के अनुसार संत रुक्खड़ स्वामी ने अमरकंटक में अपनी तपस्या पूर्ण की, जिससे प्रसन्न होकर मां नर्मदा (Narmada) ने आशीर्वाद स्वरूप वर मांगने के लिए कहा। इस पर बाबा ने कहा कि आप मेरे साथ चलिए। नर्मदा राजी हुईं और अपने अनन्य भक्त रुक्खड़ स्वामी महाराज को दिए आशीर्वाद को फलीभूत करने के लिए बाबा के पीछे चल पड़ीं। जैसे-जैसे वे आगे बढ़े नर्मदा की धारा भी उसी दिशा में बहती गईं। बाबा ने खैरागढ़ का रुख किया और मां नर्मदा को भी वहीं आने का आग्रह किया। लेकिन चकनार के पास पहुंचते ही उन्हें दिशा भ्रम हुआ और एक गड़रिए से खैरागढ़ का पता पूछा। गड़रिए ने खैरा को ही खैरागढ़ बता दिया और मां नर्मदा कुंड के रूप में वहां अवतरित हो गईं। तब से लेकर कुंड से निकलते अविरल जल पर नगर की अगाध आस्था है।



जीवनकाल में नर्मदा के दर्शनों को जाते थे बाबा



श्री रुक्खड़ स्वामी ट्रस्ट के अध्यक्ष रामकुमार सिंह बताते हैं कि मान्यता है कि अपने जीवन काल में बाबा खैरा के पास स्थित कुंड के दर्शन व स्नान के लिए नियमित तौर कुंड जाते रहे।



पहली बार होगा कुंड के जल से अभिषेक



सम्भवत: यह पहली बार होगा, जब कुंड से जल लाकर मंदिर में शिव लिंग पर चढ़ाया जाएगा, जो रुक्खड़ स्वामी के पुण्य प्रताप से खैरा में अवतरित हुईं।



रुक्खड़ मंदिर में भभूति से बने पीठ की होती है पूजा

 

रुक्खड़ बाबा ने खैरागढ़ राजा को आशीर्वाद के रूप में भभूति दी थी। इसे ही शिव स्वरूप मानकर इसकी पूजा की जाती है। इसी के पीछे मौजूद शिवलिंग में जल चढ़ाया जाता है। मंदिर के ठीक सामने यज्ञ शाला में धुनी अनवरत जल रही है।



14 महीने से जारी है निर्मल त्रिवेणी महाभियान



निर्मल त्रिवेणी महाभियान (Nirmal Triveni Mahabhiyan Khairagarh) पिछले १४ माह से लगातार जारी है। इस बार वृहद पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है।


बीते साल रोपे गए 3000 से अधिक पौधों में से ज्यादातर जीवित हैं, उनके संरक्षण का काम भी चल रहा है।


इस बार मंदिर, ईदगाह सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों से पौधारोपण का आगाज़ किया जाएगा।


नगर के सभी मुक्तिधाम व कब्रिस्तान में छायादार और फलदार पौधे रोपे जाएंगे।


बड़े स्तर पर औषधीय उद्यान भी तैयार किया जाएगा।

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Last modified on Saturday, 11 July 2020 20:39
रागनीति डेस्क-1

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