ख़ैरागढ़ 00 एक तरफ प्रशासन मोतीनाला में नदियों की गंदगी के खिलाफ मुहिम चला रहा है। तो समाजसेवियों ने 4 सालों से नदियों की निर्मलता के खिलाफ मुहिम छेड़ रखा है। अलग - अलग चरणों में निर्मल त्रिवेणी महाअभियान के बैनर तले नदियों को बचाने के सामूहिक प्रयास नगरीय स्तर पर किए जा रहे हैं। दाउ चौरा में रपटा तट पर महाअभियान के स्वयं सेवक नदियों में जमी गंदगी को निकालने के लिए प्रयास कर रहे हैं। जिसमें महाअभियान के संयोजक सूरज देवांगन,गौतम सोनी,मंगल सारथी,मनोहर चंदेल,महेश सिंदूर,पुष्पेंद्र नागवंशी सहित अन्य शामिल हैं। 5 अप्रैल 2019 में पिपरिया नदी में श्रमदान के साथ महाअभियान की शुरुवात हुई थी। तब से लेकर अब तक सैंकड़ों टन प्लास्टिक वेस्ट आमनेर,पिपरिया और मुस्का से निकाला जा चुका है। और वर्तमान में भी उक्त दिशा में प्रयासरत अनवरत जारी है।
हर घाट में हो चुका है श्रमदान
महाअभियान के तहत नगर के प्रत्येक वार्ड में नदियों के किनारे श्रमदान कर जन जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा चुका है। जिसमें बड़ी संख्या में आम जन मानस भी अपनी सहभगिता दर्ज करा चुका है।
प्लास्टिक वेस्ट ने की दुर्दशा
तीनों नदियों की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण रोजाना नदियों में गिरता प्लस्टिक वेस्ट है। जिसका कोई प्रशासनिक स्थाई इलाज़ नहीं है। जिसकी वजह पालिका में पर्याप्त व्यवस्था होने के बावजूद लोग कचरा नदियों में फेंक जा रहे है।
नालियों में बह रहा हज़ारों गैलन पानी
दाउचौरा वार्ड में सरकारी बोर से निकलने वाला हज़ारों गैलन पानी नालियों के सहारे बेज़ा बह रहा है। जिसका कोई सार्थक उपाय नहीं हो रहा है। इसे लेकर समाजसेवी कई बार पालिका से इसका रूख नदी के भराव करने की मांग कर चुके हैं। लेकिन इसका कोई स्थाई इलाज़ नहीं हो रहा है।
पिपरिया के अलावा सूखे हैं आमनेर और मुस्का
गर्मी में कभी लबलबाने वाले आमनेर और मुस्का नदी में अब पहले की तरह पानी नहीं रहता। बल्कि इन दोनों नदियों की तुलना में छिंदारी बांध की वजह से पिपरिया में रहता है हमेशा जल भराव। आमनेर और मुस्का सूखने की कगार पर आ चुका है।