ख़ैरागढ़ 00 लोक शिक्षण मद से जिले और विकासखंड में प्राथमिक, माध्यमिक और हाई स्कूल के कई स्कूलों के मररमत का कार्य जारी हुए है। जिसमे पात्र स्कूल उसमें सही जरूरी कार्य, कार्य एजेन्सी निर्धारण, कार्य कर आवंटन, कार्य की जवाबदेही और कार्य की गुणवत्ता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। जिला पंचायत सभापति विप्लव साहू ने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रक्रिया में विकास समिति के प्रबंधकों या जनप्रतिनिधियों बिना चर्चा के अपने ही जरूरत के अनुसार शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से सूचीबद्ध कर दिया गया। जबकि सही तरीका तो यह होता कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग से जुड़े हुए जिम्मेदार लोगों से चर्चा करके जर्जर शालाओं में ही जरूरत और अति आवश्यक कार्यों को ही स्वीकृत किया जाता। छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी अधिक राशि स्वीकृत हो गई है या जहां जरूरी है वहां पर कार्य स्वीकृत नहीं किए गए हैं।
भेदभाव की आ रही शिकायतें
साहू ने कहा कि मसले में हमारे निर्वाचन क्षेत्र के 100 गांव के स्कूलों में के मरम्मत कार्य स्वीकृति में भेदभाव की शिकायत आ रही है। विकासखंड में किसी एक विधानसभा को ही ध्यान में रखकर दूसरे विधानसभा को नजरअंदाज करने के कार्य में स्थानीय छोटे-बड़े जनप्रतिनिधियों को भी ध्यान देकर अपने निर्वाचन क्षेत्र के हितों को कड़ाई से ध्यान रखना पड़ेगा। मररमत कार्य में छज्जा और छत को तोड़कर नए ढंग से छत, प्लास्टर, टाइल्स, पुट्टी, पेंटिंग आदि की व्यवस्था के लिए प्रत्येक स्कूल में बड़ी राशि आई है, जिसका समुचित उपयोग शिक्षाहित बहुत जरूरी है।
बाहर के ठेकेदारों को दिया गया मरम्मत का कार्य
साहू ने कहा कि काम को स्थानीय पंचायत या शाला विकास समिति को न देकर बाहर के ठेकेदारों को दिया जा रहा है, यानि कि शाला विकास समिति और प्राचार्य को अपने खातों से पैसों को निकाल कर चुपचाप ठेकेदारों को देना पड़ेगा। अब सवाल यह होता है कि काम की गुणवत्ता और उसकी जवाबदेही की जिम्मेदारी कौन लेगा। इस कार्य में स्पष्ट रूप से स्थानीय पंचायत और शाला विकास समिति के अधिकारों का हनन हो रहा है। जिला प्रशासन को तत्काल इस बड़े मसले पर कार्यवाही करते हुए निगरानी अधिकारी नियुक्त करके स्थानीय पंचायत या शाला विकास समिति से ही इस कार्य को गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया जाना चाहिये।