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स्वार्थ की राजनीति : ठेकेदारी और सप्लाई के बाद दुकानों की नीलामी में भी पार्षदों का अड़ंगा Featured

ख़ैरागढ़ 00 पालिका में ठेकेदारी से लेकर सामान सप्लाई तक का काम करने वाले पार्षद अब दुकान नीलामी में भी सीधा हस्तक्षेप कर रहे हैं। 13 जुलाई को नवनिर्मित दुकानों की नीलामी थी। नीलामी शुरू भी हुई पर कुछ दुकानों की नीलामी प्रक्रिया के बाद रद्द हो गई। भाजपा - कांग्रेस के पार्षद ही बोली कर्ताओं को बोली लगाने से रोकते गए। दरअसल,नगर पालिका की ओर से राजस्व की बढ़ोतरी के लिए गुरुवार को धरमपुरा वार्ड में स्थित व्यावसायिक कॉम्पलेक्स की नीलामी कराने की तैयारी थी। वहीं कुछ पार्षदों की ओर से नीलामी में रुचि लेते हुए कथित तौर पर बोलीकर्ताओं से सांठगांठ किए जाने से पालिका को प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ गई।पालिका द्वारा लगभग 50 लाख रुपए की लागत से व्यावसायिक कॉम्पलेक्स का निर्माण करा कर इसकी गुरूवार को नीलामी रखी गई थी। लगभग 21 दुकानों के इस कॉम्पलेक्स से पालिका को नीलामी के बाद बडे़ राजस्व की उम्मीद थी।दो दुकानों की नीलामी के बाद बाकी दुकानों की बोली लगाने के दौरान पालिका के कुछ पार्षद ही इसमें दिलचस्पी दिखाने लगे। 


मात्र 13 दुकानों की हो पाई नीलामी


बोली कर्ताओं को बोली में शामिल नहीं होने लालच देने जैसी जानकारी सामने आने लगी। दो तीन दुकानों की नीलामी के बाद बाकी की दुकानों की बोली उम्मीद के मुताबिक रेट के बिना ही बिकने लगी। इसकी जानकारी पालिका प्रशासन को होते ही 13 दुकानाें की नीलामी के बाद ही नीलामी स्थगित करवा दी गई। धरमपुरा के दुकानाें के साथ कलेक्ट्रेट भवन के सामने बनाई गई पालिका के कॉम्पलेक्स की 5 दुकानों की नीलामी भी इसी के साथ रखी गई थी।


सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास


नीलामी स्थगित होने के बाद भाजपा पार्षद के जुगाड़ की जानकारी होते ही भाजपा पदाधिकारी भी इसमें गरम हो गए। पार्टी संगठन के सोशल साइट ग्रुप में पूर्व भाजपा पदाधिकारी ने मामले को लेकर जमकर भड़ास निकालते लिखा कि भाजपा के पार्षद ही पार्टी के कार्यकर्ता से दुकान लेने और रोकने कमीशन की बात कर रहे थे। ऐसे में पार्टी का कार्यकर्ता कैसे सहयोग करेगा। दोबारा ऐसी घटना दोहराने पर कड़ी कार्रवाई की बात भी कही गई।


पार्षदाें की वजह से कम हो गए बोलीकर्ता


नीलामी में शामिल होने आए कई बोलीकर्ताओं ने बताया कि धरमपुरा की दुकानो की नीलामी शुरू होते समय बोलीकर्ता बड़ी संख्या में थे। लेकिन तीन-चार दुकानों की नीलामी के बाद बोलीकर्ताओ की संख्या कम होने लगी। इन दुकानाें को लेने में कांग्रेस सहित भाजपा के पार्षद भी सक्रिय हो गए। बोलीकर्ताओं को ऊंची बोली लगाने से रोकने नीलामी स्थल से बाहर इसके लिए जुगाड़ शुरू हो गया। जुगाड़ होते ही बाकी की दुकानों की नीलामी में पालिका को अपेक्षाकृत रेट नहीं मिल पाए। 


बाद की दुकानों में लगी 5 से 8 लाख की बोली


पहली तीन दुकानें 10 से 15 लाख रू तक बिकी तो बाद की दुकानाें के 5 से 8 लाख तक बोली ही लगाई गई। बताया गया कि कांग्रेस के एक पार्षद बोलीकर्ताओं को बोली लगाने से रोकने में जुट कर अपने लोगाें के लिए दुकानों की बोली कम करवाने में जुटे रहे तो दूसरी ओर एक भाजपाई पार्षद तो एक दुकान कम रेट में लेने आधा दर्जन बोली कर्ताओं को चुप कराने में सफल हो गए। 12 दुकानाें की नीलामी के बाद पालिका के नीलामीकर्ता कर्मचारियों को इसकी भनक लगी। अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जिसके बाद बाकी नीलामी को अपरिहार्य कारण बताते हुए स्थगित की गई।


पालिका को 4 करोड़ से अधिक की उम्मीद


धरमपुरा सहित टिकरापारा मोड़ पर कलेक्ट्रेट के सामने बनाए गए व्यावसायिक कॉम्पलेक्स की नीलामी से पालिका को चार करोड़ से अधिक की आय की उम्मीद है लेकिन धरमपुरा में दो तीन दुकानाें की नीलामी के बाद जुगाड़ में रेट गिरने से राजस्व मे कमी से पालिका प्रशासन ने आनन-फानन मे बोली स्थगित करवा दी।


परिहार्य कारणों से स्थगित हुई नीलांज


सीएमओ कुलदीप झा ने बताया कि अपेक्षाकृत बोली नहीं आने सहित अपरिहार्य कारणाें के चलते धरमपुरा के व्यावसायिक कॉम्पलेक्स की नीलामी स्थगित करवाई गई है। शेष दुकानों की नीलामी जल्द करवाई जाएगी। 

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