खैरागढ़. खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिले के छुईखदान आईसीडीएस परियोजना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की भर्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। डीहीपारा केंद्र में चयन प्रक्रिया के दौरान पात्र आवेदिका को हटाकर अपात्र महिला को पदोन्नति देकर नियुक्त करने का गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ता जानकी यदु ने इस पूरे मामले की विस्तृत शिकायत कलेक्टर को भेजी है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मामले की शुरुआत 15 अप्रैल 2025 को जारी विज्ञप्ति से होती है, जिसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के कुल 11 रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 29 अप्रैल 2025 तय की गई थी। डीहीपारा केंद्र के लिए भी कार्यकर्ता का पद शामिल था। शैक्षणिक योग्यता के अनुसार इस पद के लिए 12वीं पास होना अनिवार्य था। इसी आधार पर डीहीपारा से दो आवेदन आए—पहला जानकी यदु का, जिन्होंने 12वीं की अंकसूची जमा की थी, और दूसरा नोटिस मरकाम का, जिन्होंने 12वीं की योग्यता प्रस्तुत ही नहीं की। इसलिए नोटिस मरकाम को उसी समय अपात्र घोषित कर दिया गया।
दावा आपत्ति की भी प्रक्रिया चली
बाद में जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद अनंतिम मूल्यांकन सूची जारी की गई। इसमें जानकी यदु को कुल 46.80 अंक प्राप्त हुए, जबकि नोटिस मरकाम को मात्र 22 अंक मिले। यानी जानकी यदु इस पद के लिए स्पष्ट रूप से पात्र थीं। दावा–आपत्ति की प्रक्रिया 13 जून 2025 तक चली, लेकिन नोटिस मरकाम की अपात्रता रिकॉर्ड में पूरी तरह साफ थी।
पदोन्नति ही करनी थी, तो नई भर्ती निकालने क्या अर्थ ?
इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को विवादों के केंद्र में ला दिया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि परियोजना अधिकारी सुनील कुमार बंजारे ने अपात्र घोषित की गई नोटिस मरकाम को ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बना दिया। इतना ही नहीं, नोटिस मरकाम पहले सहायिका के रूप में कार्यरत थीं, और शिकायत के अनुसार अधिकारी ने उन्हें सीधे पदोन्नत कर कार्यकर्ता बना दिया, जबकि उस पद पर पहले से वैध भर्ती प्रक्रिया जारी थी। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि पदोन्नति ही करनी थी, तो नई भर्ती निकालने का अर्थ ही क्या था।
अब अधिकारी कर रहे बदसलूकी
जानकी यदु ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत चयन प्रक्रिया की जानकारी मांगी, तब परियोजना अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और कहा—जिसे नियुक्त कर दिया है, कर दिया… जहां जाना है जाओ, तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। यह आरोप मामला और संवेदनशील बना देता है।
शिकायत में साफ कहा गया है कि अपात्र महिला की नियुक्ति पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है और उसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। साथ ही परियोजना अधिकारी द्वारा किए गए दुर्व्यवहार और नियम उल्लंघन के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। यह मामला अब जिला प्रशासन की अदालत में है।
सीधी बात ( छुईखदान परियोजना अधिकारी सुनील बंजारे)
प्रश्न 1: नोटिस मरकाम को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कैसे बनाया गया? क्या यह चयन नियमों के अनुरूप है?
उत्तर: नियुक्ति पूरी तरह नियमों के तहत हुई है। नोटिस मरकाम पहले से सहायिका के पद पर कार्यरत थीं और सरकार का स्पष्ट प्रावधान है कि रिक्त कार्यकर्ता पदों में से 50 प्रतिशत प्रमोशन के माध्यम से भरे जाते हैं। इसी नियम के अनुरूप उन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में पदोन्नत किया गया है।
प्रश्न 2: जब प्रमोशन का नियम था तो फिर सीधी भर्ती का विज्ञापन क्यों निकाला गया?
उत्तर: सीधी भर्ती का विज्ञापन गलती से जारी हो गया था। जब नोटिस मरकाम ने अपना अभ्यावेदन दिया तब यह ध्यान आया कि इस पद पर प्रमोशन ही होना चाहिए। इसके बाद मामले को स्थायी समिति के सामने रखा गया। समिति ने चर्चा कर स्पष्ट निर्णय लिया कि यहां सीधी भर्ती नहीं की जा सकती थी, इसलिए नियम के अनुसार प्रमोशन दिया गया।
प्रश्न 3: स्थायी समिति के सदस्यों ने ही निर्णय लिया और बाद में वही लोग शिकायत कर रहे हैं—इस पर आपकी प्रतिक्रिया?
उत्तर: स्थायी समिति के सदस्य बैठक में उपस्थित थे, निर्णय भी उन्होंने ही लिया और फाइल में हस्ताक्षर तक किए। अब वही लोग शिकायत कर रहे हैं—इसका कारण वही जानें। रिकॉर्ड में सब स्पष्ट लिखा हुआ है और उस पर उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं।
प्रश्न 4: नोटिस मरकाम ने 12वीं का प्रमाणपत्र नहीं दिया, फिर भी उन्हें कैसे नियुक्त कर दिया गया?
उत्तर: प्रमोशन प्रक्रिया में योग्यता तभी देखी जाती है जब एक से अधिक सहायिकाएँ प्रमोशन के लिए आवेदन करती हैं। इस मामले में नोटिस मरकाम एकमात्र प्रमोशन अभ्यर्थी थीं। इसलिए 12वीं की अंकसूची की कोई अनिवार्यता नहीं थी और योग्यता को आधार बनाया ही नहीं गया।
प्रश्न 5: शिकायत में यह भी आरोप है कि आपने अभ्यर्थी और उसके परिजनों से दुर्व्यवहार किया—क्या यह सही है?
उत्तर: यह पूरी तरह गलत आरोप है। मेरी आज तक न तो अभ्यर्थी से मुलाकात हुई है और न ही उनके परिजनों से। ऐसे में दुर्व्यवहार की बात ही नहीं उठती। यदि कोई सबूत है तो सामने रखा जाए।
प्रश्न 6: नोटिस मरकाम प्रमोशन के लिए पात्र कैसे थीं?
उत्तर: सरकार का नियम है कि कोई भी सहायिका यदि पाँच वर्ष से अधिक अवधि तक कार्यरत है, तो वह प्रमोशन के लिए पात्र होती है। नोटिस मरकाम सिंगबोरा में कई वर्षों से सहायिका के पद पर कार्यरत थीं, इसलिए वे पूरी तरह पात्र थीं।