खैरागढ़. जिले के संडी प्रस्तावित श्री सीमेंट परियोजना को लेकर बने माहौल के बीच कंपनी ने सोमवार को पत्रकारों के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उद्योग लगने से क्षेत्र में रोजगार, आर्थिक गतिविधियाँ और बुनियादी सुविधाओं का विकास तेज़ होगा। रेस्ट हाउस में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में कंपनी के कॉरपोरेट जोनल हेड रवि तिवारी, छत्तीसगढ़ हेड प्रमोद दुबे, कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रावाल, जिला पंचायत सीईओ प्रेमकुमार पटेल और खनिज अधिकारी इंद्रलाल मौजूद रहे।
कंपनी ने बताया कि अब तक 180 एकड़ जमीन किसानों से सीधे खरीद ली गई है, जबकि 20 एकड़ का एग्रीमेंट जारी है। परियोजना के लिए 404 हेक्टेयर माइनिंग लीज़ स्वीकृत है, और नियमानुसार डम्पिंग सिर्फ इसी क्षेत्र के भीतर की जाएगी। अधिकतम 30 मीटर गहराई तक ही खनन की अनुमति है।
रोजगार की संभावनाएँ
कंपनी के अनुसार, प्लांट व माइनिंग गतिविधियों से 138 लोगों को प्रत्यक्ष नौकरी मिलेगी, जबकि सप्लाई चैन और ठेकेदारों के माध्यम से 1,200 से अधिक लोगों को रोजगार का अवसर होगा। अप्रत्यक्ष प्रभाव मिलाकर 8–10 हजार लोगों तक रोजगार सृजन की संभावना बताई गई। कंपनी ने कहा कि स्थानीय युवाओं और स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
पर्यावरण प्रबंधन
कंपनी ने कहा कि खनन के बाद गड्ढों को या तो मिट्टी से भरकर पुनर्स्थापित किया जाएगा या वाटर टैंक में बदला जाएगा, जिससे सिंचाई, पेयजल और मछली पालन में लाभ मिल सके। धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी छिड़काव, और आसपास लाखों पौधे लगाने की योजना भी साझा की गई।
पारदर्शिता और सामाजिक दायित्व
कंपनी ने कहा कि सीएसआर व डीएमएफ फंड से शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा सुधार की योजनाएँ लागू होंगी। सभी निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया और सार्वजनिक सुनवाई के बाद ही लिए जाएँगे। कंपनी ने भरोसा दिया कि अफवाहों से बचने के लिए तथ्यात्मक जानकारी लगातार साझा की जाएगी।
सीधी सवाल ( रवि तिवारी, कॉरपोरेट जोनल हेड )
प्रश्न — आपने कंपनियों के पक्ष में कहा कि जमीन खरीद पारदर्शी है; किन लोगों से और किस तरीके से जमीन खरीदी गई है?
उत्तर — जमीन खरीदी किसानों से सीधे हुई है — कंपनी बाजार मूल्य पर तथा लिखित एग्रीमेंट के साथ लेन-देन कर रही है। अब तक लगभग 180 एकड़ की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है और 20 एकड़ के लिए एग्रीमेंट प्रक्रिया में है। कोई जबरन ज़बरदस्ती नहीं हुई।
प्रश्न — कुछ लोगों का कहना है कि बाहर के लोग आएँगे और सामाजिक-समस्याएँ बढ़ेंगी (छेड़छाड़, आवास आदि)। कंपनी क्या गारंटी देती है?
उत्तर — कंपनी स्पष्ट कर रही है कि स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी — भर्ती, ठेके और सप्लाई में लोकल को प्राथमिकता मिलेगी। बाहरी कामगारों की संख्या नियंत्रित रहेगी; कॉलोनी बाते प्रशासनिक नियमों के अनुसार और कम्पनी नीति के तहत ही होंगी। महिलाओं की सुरक्षा गंभीर मुद्दा है — कंपनी स्थानीय समुदाय व प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा व संवेदनशीलता बनाए रखेगी।
प्रश्न — माइनिंग से बनने वाले वेस्ट/डम्प कहाँ रखेंगे? क्या लीज़ के बाहर डम्प रखा जाएगा?
उत्तर — कानूनी बाध्यता अनुसार वेस्ट केवल माइनिंग लीज़ (404 हेक्टेयर) के भीतर ही रखा जाएगा; लीज़ के बाहर डम्प नहीं रखा जा सकता। यह नियम कंपनी सख्ती से मानती है।
प्रश्न — खनन गहराई और ब्लास्टिंग के बारे में चिंता है — क्या सीमा है और क्या साउंड/वाइब्रेशन से घरों को नुकसान होगा?
उत्तर — अनुमति केवल 30 मीटर तक खनन की है — उससे अधिक नहीं। ब्लास्टिंग आधुनिक नियंत्रित तकनीकों से होगी; मानक के अनुरूप मॉनिटरिंग रहेगी। यदि किसी तरह की हानि होती है तो मुआवजा दिया जाएगा — कंपनी का दावा है कि कंट्रोल ब्लास्टिंग से साउंड पॉल्यूशन न्यूनतम रहेगा।
प्रश्न — पानी (वॉटर लेवल) पर प्रभाव के संबंध में लोग चिंतित हैं — आप क्या समझाते हैं?
उत्तर — कंपनी ने बताया कि प्रारम्भिक तीन वर्षों में अंडरग्राउंड वॉटर के उपयोग की अनुमति मिली है परन्तु माइनिंग के बाद पिट को या तो मिट्टी से भरकर लौटाया जाएगा या वाटर पिट/टैंक में बदलकर स्थानीय उपयोग (पेयजल, मछली पालन, सिंचाई) के रूप में दिया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि इससे वॉटर लेवल प्रभावित नहीं होगा; क्लोजर प्लान और मॉनिटरिंग अनिवार्य होगी।
प्रश्न — सड़कों/नहर/हाई-टेंशन लाइनों के रास्ते प्रभावित हुए तो क्या होगा?
उत्तर — अगर किसी सरकारी रोड/नहर/एचटी लाइन का मार्ग खनन क्षेत्र से गुजरता है तो कंपनी सरकार से परमिशन लेकर या फिर जिम्मेदारी लेकर डायवर्सन/रास्ता बनाएगी — यह कंपनी की जिम्मेदारी होगी और जरूरी ज़मीन व प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
प्रश्न — रोजगार के अनुमान और संख्या कितनी हैं — और क्या भर्ती स्थानीय स्तर पर होगी?
उत्तर — कंपनी ने बताया — सीधे तौर पर लगभग 180 नौकरियाँ प्लांट में और ठेकों/सप्लाई चैन से जोड़कर लगभग 1,200 तक सीधे तथा कुल मिलाकर डायरेक्ट+इनडायरेक्ट 8-10 हज़ार तक रोजगार का लाभ मिलेगा। भर्ती में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी और कॉन्ट्रैक्टर्स में भी लोकल श्रमिकों को प्राथमिकता का आश्वासन दिया गया है।