21 दिसंबर तक 15.75 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी
खैरागढ़. रागनीति की टीम द्वारा की गई पड़ताल में केसीजी जिले की धान खरीदी व्यवस्था में एक गंभीर और सुनियोजित गड़बड़ी सामने आई है। पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि धान खरीदी केंद्रों पर किसानों से मानक से अधिक तौल कर धान लिया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा नुकसान और समितियों को करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ हो रहा है। यह सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक लूट है, जिसमें तौल मशीन, समिति प्रबंधक और चुप बैठा सिस्टम—तीनों बराबर के भागीदार नजर आ रहे हैं।
जिले में 21 दिसंबर तक कुल 15,75,298 क्विंटल धान की खरीदी 51 सोसायटियों के माध्यम से की गई है। इसमें धान मोटा: 1,80,630 क्विंटल, धान पतला: 3,32,724 क्विंटल, धान सरना: 10,61,944 क्विंटल शामिल है। कागजों में सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग निकली।
मानक 40.700 किलो, खरीदी 41.100 से 41.200 किलो
सरकारी मानक के अनुसार एक बोरे में 40.700 किलो धान लिया जाना चाहिए। मगर रागनीति की पड़ताल और किसानों की शिकायतों में यह तथ्य सामने आया कि कई केंद्रों पर 41.100 से 41.200 किलो तक धान तौला जा रहा है। यानी हर बोरे में 400 से 500 ग्राम अतिरिक्त धान बिना भुगतान के ले लिया जा रहा है।
पाटा सोसायटी से उठी पहली शिकायत
जिले की पाटा सोसायटी में एक किसान ने कलेक्टर के पास शिकायत दर्ज कराई कि उससे 41.200 किलो प्रति बोरा के हिसाब से धान लिया गया। इसके बाद अन्य सोसायटियों में भी इसी तरह की गड़बड़ियों के मामले सामने आने लगे। कई जगह नेताओं के निरीक्षण और किसानों की मौखिक शिकायतों ने इस खेल की पुष्टि की।
आंकड़ों से खुला पूरा खेल
अब तक की खरीदी अनुसार यदि कुल खरीदी 15,75,298 क्विंटल (यानी 15,75,29,800 किलो) को सरकारी मानक 40 किलो प्रति बोरा से विभाजित किया जाए, तो कुल लगभग 39,38,245 बोरे उपयोग में आए।
अब यदि न्यूनतम 400 ग्राम अतिरिक्त धान हर बोरे में लिया गया हो, तो कुल अतिरिक्त धान होता है—
39,38,245 बोरे × 0.4 किलो = लगभग 15,75,298 किलो, यानी करीब 15,752 क्विंटल।
3.73 करोड़ का सीधा लाभ, उतना ही नुकसान किसानों को
सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 2,369 रुपये प्रति क्विंटल है। इस हिसाब से
15,752 क्विंटल × 2,369 रुपये = लगभग 3 करोड़ 73 लाख 16 हजार 488 रुपये।
यानी समितियों को इतना शुद्ध लाभ और किसानों को उतना ही सीधा नुकसान।
किसान समझ नहीं पाए, इसलिए खामोशी रही
कई किसानों ने इसलिए आवाज नहीं उठाई क्योंकि उन्हें लगा कि “सिर्फ 400 ग्राम ही तो ज्यादा लिया जा रहा है।” वे यह नहीं समझ पाए कि यही 400 ग्राम जब लाखों बोरों में जुड़ता है, तो करोड़ों का खेल बन जाता है। इसी खामोशी का फायदा उठाकर समिति प्रबंधकों ने इस व्यवस्था को लंबे समय तक जारी रखा।
धान खरीदी में फ्लैट मल्टीप्लिकेशन अव्यवहारिक : सहायक आयुक्त सहकारिता
केसीजी जिले के सहायक आयुक्त सहकारिता राज किशोर झा ने कहा कि प्रति बोरा 300–400 ग्राम अतिरिक्त तौल को पूरे जिले की कुल खरीदी से सीधे गुणा कर करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाना व्यवहारिक और वास्तविक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। जिन खरीदी केंद्रों को लेकर शिकायतें संज्ञान में आई हैं, वहां तत्काल सघन जांच कराई जाती है और आगे भी नियमानुसार जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय टीम नियमित रूप से खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर रही है तथा नमी और तौल की प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, हालांकि सीमित स्टाफ और जिले में 51 खरीदी केंद्र होने के कारण एक साथ हर स्थान पर निगरानी चुनौतीपूर्ण है। अधिकारी ने यह भी कहा कि किसानों की किसी भी लिखित या मौखिक शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और जहां भी अनियमितता की आशंका होगी, वहां मौके पर मिलान व सत्यापन कर आवश्यकतानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जालबांधा समिति में धान बोरा तौल में 41 किलो पाया गया- विधायक
धान खरीदी में तौल गड़बड़ी के मामले को लेकर कांग्रेस विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार की नाक के नीचे 40 किलो 700 ग्राम के निर्धारित मानक के बजाय हर बोरे में 300 से 400 ग्राम अतिरिक्त तौल किया जाना किसी एक सोसायटी की चूक नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करता है। विधायक वर्मा ने बताया कि पिछले सप्ताह जालबांधा समिति का निरीक्षण किया गया, जहां धान बोरा तौल में 41 किलो पाया गया। इस पर संबंधित कर्मचारियों और प्रबंधन को तत्काल समझाइश दी गई। उन्होंने आगे कहा कि अन्य धान खरीदी केंद्रों को लेकर भी किसानों और समितियों से लगातार अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिनकी जानकारी जुटाई जा रही है।
