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नए जिले में केसीजी के 22 गांवों में मिलेगी मोबाइल कनेक्टिविटी Featured

नए जिले में मोबाइल टावर और नेटवर्क विहीन 22 गांवों में भी जल्द ही मोंबाइल की घंटियां घनघनाने लगेगी। जिले के गठन के बाद दूरसंचार विभाग नें कलेक्टर को पत्र लिखकर वनांचल क्षेत्रों के 22 मोबाइल विहीन गांवों में मोबाइल टावर लगाए जाने शासकीय जमीन देने की मांग की है। वनांचल क्षेत्रों में अब तक मोबाइल कवरेज नही होने के चलते इन गांवों के रहवासी मोबाइल कनेक्टीविटी से दूर है


खैरागढ़ 00  विभाग ने कलेक्टर को जमीन की मांग करते कहा कि टावर स्थापित करनें जमीन उपलब्ध होते ही इन गांवों में मोंबाइल कवरेज की समस्या खत्म हो जाएगी। विभाग जल्द ही इन गांवों में मोबाइल टावर खड़ा कर मोबाइल कनेक्टिविटी जोड़ देगा। दूरसंचार विभाग द्वारा लगातार कार्यवाही और डिजीटल व्यवस्था बढ़नें के बाद भी खैरागढ़ छुईखदान गंडई जिले के 22 गांव आज भी मोबाइल विहीन है। इन गांवों में खैरागढ़ ब्लाक में आने वाले 8 गांव और छूईखदान ब्लाक के 16 गांव शामिल है। खैरागढ़ ब्लाक के वनांचल ग्राम दल्लीखोली, सहसपूर, गातापार, नवांगांव, लिमऊटोला, सांकरी, बरगांव, करेलागढ़ में मोबाइल कवरेज अब तक नही पहुंच पाया है। जबकि छूईखदान ब्लाक के वनांचल ग्राम भुजारी, झिलमिली, गोंगले, चोभर, भोथली, सरोधी, लमरा, नवांगांव, कुम्ही, खाम्ही, समुंदपानी, खर्रा, दल्ली, पिपराही में कवरेज और मोबाइल कनेक्टिविटी नही बन पाई है। इन गांवों के लोगों को मोबाइल नेटवर्क के लिए अभी दस से बारह किमी दूर तक जाना पड़ता है। गांव में किसी प्रकार की दूर्घटना अथवा आपातकालीन परेशानियों पर ग्रामीणों का संपर्क नही हो पाता है।

 
4-जी अपग्रेड के साथ मोबाइल सुविधा


कलेक्टर को लिखे पत्र में दूरसंचार विभाग ने इन गांवों में जमीन उपलब्ध कराने की मांग करते कहा कि 4-जी प्रोजेक्ट के तहत बीएसएनएल इन गांवों में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा बढ़ाने की तैयारी में जुटा है। इन कार्य के क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार ने 500 दिनों की समयसीमा निर्धारित की है। इन गांवों में मोबाइल टावर स्थापित करने 200 वर्ग मीटर खुली जगह शासकीय या किराए पर उपलब्ध कराने की मांग करते कहा गया है कि जमीन उपलब्ध होने के बाद इन गांवों में 4 जी कनेक्टिविटी के टावर लगाए जाने के बाद मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध हो जाएगी।

 

बढे़गी कनेक्टिविटी, सुरक्षा सहित अन्य लाभ भी


जिन गांवों में मोबाइल टावर लगाए जाने है उसमें से अधिकांश नक्सलप्रभावित संवेदनशील इलाके है। डिजीटल सिस्टम होने के बाद भी इन गांवों में स्वास्थ्य सहित आपातकालीन सेवा में मोबाइल का फायदा नही मिल पाता। दूसरी ओर आधे से ज्यादा गांवों या उसके आसपास पुलिस सहित सुरक्षा बलों के कैंप और थाने है। सुरक्षा सहित नक्सली गतिविधियों को रोकने में भी टावर और नेटवर्क बड़ी भूमिका निभाएगा।


टीएसी की पहली बैठक उठाया था कनेक्टिविटी का मुद्दा


टेलीफोन एडवाइजरी कमेटी की पहली बैठक में टीएससी सदस्य भागवत शरण सिंह ने नवगठित जिले में कनेक्टिवटी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को उठाया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि कई गांव ऐसे हैं जहां नेटवर्क की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है।

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