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खैरागढ़-छुईखदान-गंडई : पंचायत सचिवों का तबादला आदेश विवादों में, सचिव संघ ने जताई कड़ी नाराजगी Featured

सीईओ का भी बदला प्रभार, सचिव संघ बोला – नियम विरुद्ध हुआ ट्रांसफर

खैरागढ़. जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में पंचायत सचिवों का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। जिला पंचायत कार्यालय से जारी आदेश में कुल 47 पंचायत सचिवों का तबादला किया गया है, जिसमें जनपद पंचायत खैरागढ़ से 26 और छुईखदान से 21 सचिव शामिल हैं। आदेश पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) प्रेम कुमार पटेल के हस्ताक्षर हैं और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह एक और आदेश में छुईखदान जनपद पंचायत के सीईओ रवि कुमार को जिला पंचायत कार्यालय में संलग्न करते हुए प्रकाशचंद्र तारम, प्र. परियोजना अधिकारी, को आगामी आदेश तक छुईखदान जनपद पंचायत का प्रभार सौंपा गया है।

सचिव संघ की आपात बैठक, विरोध का ऐलान

जारी आदेश के बाद सचिव संघ ने आपात बैठक बुलाकर कड़ा विरोध जताया। जिला अध्यक्ष सचिव संघ, लोकेश जंघेल ने कहा कि यह पूरा ट्रांसफर आदेश नियम विरुद्ध है और शासन की वर्ष 2008 की भर्ती नियमावली का खुला उल्लंघन है।

लोकेश जंघेल ने साफ कहा कि नियम के मुताबिक किसी भी पंचायत सचिव का स्थानांतरण 10 किलोमीटर से अधिक दूरी पर नहीं किया जा सकता, लेकिन इस बार की ट्रांसफर करके 20–70 किलोमीटर दूर तक सचिवों को भेज दिया गया है, जो कि ट्रांसफर नियम 2008 की कंडिका 8 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर से पहले जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अनुशंसा लेना अनिवार्य है, परंतु इस बार उस प्रक्रिया को भी पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।

सचिव संघ अध्यक्ष ने आगे कहा कि नियम यह भी कहता है कि हर साल केवल 10 प्रतिशत पंचायत सचिवों का ही तबादला स्वेच्छिक आधार पर या शिकायत की पुष्टि होने पर किया जा सकता है, लेकिन इस बार लगभग 21 प्रतिशत सचिवों का स्थानांतरण कर दिया गया है। यह सीधा–सीधा नियम का उल्लंघन है और इससे सचिवों में गहरा असंतोष है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत सचिवों के स्थानांतरण से पहले प्रभारी मंत्री की स्वीकृति लेना अनिवार्य है, परंतु इस प्रक्रिया को भी पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सचिवों का तबादला बिना अनुमोदन और प्रक्रिया के हुआ है, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध और मनमाना निर्णय है।

शासन का पुराना आदेश आया चर्चा में

सचिव संघ ने इस विवाद में छत्तीसगढ़ शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का पुराना आदेश (29 अगस्त 2008, मार्गदर्शिका-2008) भी सामने रखा है। इस आदेश में स्पष्ट किया गया था कि पंचायत सचिवों का स्थानांतरण केवल जनपद पंचायत की अनुशंसा और जिला पंचायत के सीईओ की कार्यवाही के आधार पर ही हो सकता है। बिना प्रक्रिया के किए गए तबादले को नियम विरुद्ध माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तक का प्रावधान है।

ज्ञापन सौंपने की तैयारी

सचिव संघ ने कहा है कि इस आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए अन्यथा आगामी दिनों में आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे। जिला अध्यक्ष लोकेश जंघेल ने बताया कि सचिव संघ इस संबंध में जल्द ही कलेक्टर और प्रभारी मंत्री को ज्ञापन सौंपेगा।

प्रशासन का संदेश और संघ का विरोध

जहां जिला प्रशासन का दावा है कि यह तबादला पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है, वहीं सचिव संघ का कहना है कि आदेश पूरी तरह नियम विपरीत है और इससे सचिवों में गहरा असंतोष फैल गया है।

सचिवों का स्थानांतरण पूरी तरह प्रशासनिक आधार पर किया गया- पटेल 

जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल ने कहा कि अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि नियमों का उल्लंघन हुआ हो। सीईओ पटेल ने कहा कि सचिवों का स्थानांतरण पूरी तरह प्रशासनिक आधार पर किया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर सचिव संघ यह कह रहा है कि तबादला नियम विपरीत हुआ है तो नियमों को देखकर स्थिति स्पष्ट कर ली जाएगी। प्रशासन का दावा है कि तबादले का मकसद पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

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Last modified on Wednesday, 20 August 2025 21:25

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