खैरागढ़ 00 जिले के ग्राम पांडादाह में भगवान जगन्नाथ के मंदिर में रथयात्रा पर्व में अलग तरह की परंपरा है। यहां भगवान जगन्नाथ जी रथयात्रा के दौरान लोगों के कांधे पर बैठकर मंदिर की परिक्रमा करते हैं। जहां पर रथयात्रा में भगवान रथ पर नही बल्कि कांधे पर बैठकर मंदिर की परिक्रमा करते हैं। राजनांदगांव रियासत की राजधानी रही ग्राम पांडादाह में ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ जी मंदिर परिसर के बाहर नही जाते,जिसे देखते हुए रथयात्रा पर्व के दौरान भगवान जगन्नाथ,बलदाऊ भैया व बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को मंदिर सेवा समिति के सदस्यों के द्वारा कांधे पर बैठाकर मंदिर की परिक्रमा कराई जाती है।
की गई मंदिर की परिक्रमा
आषाढ़ के महीने में रथयात्रा पर्व देशभर में मनाई जाती है पुरी की तरह ही मान्यता वाले खैरागढ़ ब्लॉक के ग्राम पांडादाह में भी रथयात्रा पर्व धूमधाम से मनाया गया। जहां पर रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ,बलदाऊ भैया व बहन सुभद्रा मंदिर सेवा समिति के सदस्यों के कांधे पर बैठकर मंदिर से बाहर निकले। परंपरानुसार मंदिर से बाहर निकलकर भगवान ने परिसर में ही परिक्रमा की। जिसके पश्चात लोगों ने भगवान जगन्नाथ जी,बलदाऊ भैया व बहन सुभद्रा के दर्शन किये।
30 हज़ार से अधिक की संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु
पांडादाह में रियासत काल से रथयात्रा पर्व मनाने की परंपरा है जहां रथयात्रा में मेला भी लगता है इस वर्ष भी पांडादाह के रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने व मेले में लगभग 30 हजार से अधिक लोग पांडादाह पहुंचे। प्रतिवर्ष अनुसार रथयात्रा में ग्राम पांडादाह में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया । रथयात्रा के पश्चात भगवान के दर्शन के लिए रात तक लोगों की भीड़ लगी रही। रथयात्रा में भगवान के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालुओं को गजामूंग व हलवा पूड़ी का प्रसाद दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ जी का दर्शन करना अति शुभ होता है व भगवान लोगों की मुरादें पूरी करते हैं। प्रतिवर्ष रथयात्रा के दूसरे दिन भी काफी संख्या में लोग भगवान जगन्नाथ जी के दर्शन करने पांडादाह पहुंचते हैं इस वर्ष भी दूसरे दिन हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है।