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गिरोदपुरी में विकास के नाम पर नहीं रखी एक ईंट - कमलेश कोठले Featured

खैरागढ़ 00 प्रदेश के विकासखंडों में मॉडल जैतखंभ निर्माण के लिए एक दिन पहले सीएम भूपेश बघेल वर्चुअल शिलान्यास किया। इसे वोटबैंक की राजनीति बताते हुए जिला केसीजी भाजपा अनुसूचित जाति के महामंत्री व पूर्व पार्षद कमलेश कोठले ने कहा कि पूरे पांच साल गुजर जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस और सीएम भूपेश बघेल को सतनामी समाज की याद आई। जबकि इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने गिरौदपुरी में बाबा गुरू घासीदास जी के जन्मस्थली को संरक्षित करने के लिए जो राशि स्वीकृत की थी उसे कांग्रेस ने वापस ले लिया था। अब वाहवाही बटोरने और सतनामी समाज के वोट हासिल करने के लिए भूपेश बघेल प्रदेश के विकासखंडों में जैतखंभ बनाने जा रही है। श्री कोठले ने कहा मॉडल जैतखंभ बनाने के निर्णय का स्वागत है लेकिन गुरू घासीदास बाबा के जन्मस्थली गिरौदपुरी में इतना पैसा लगाकर वहां विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करा सकती थी।


महानदी के तट पर बसे ग्राम गिरौदपुरी में  माघ पूर्णिमा 18 दिसम्बर 1756 में एक बालक का जन्म हुआ जो आगे चलकर संत बाबा गुरु घासीदास के नाम से प्रसिद्ध हुए। गुरु घासीदास अपने सद्कार्यों के कारण सतनाम पंथ के प्रवर्तक माने जाते हैं। इस स्थल के संबंध में किंवदन्ती है कि नदी के तट पर सोनाखान के राजा की सेना ने डेरा डाला था, जो शापित होने के कारण पाषाण में परिवर्तित हो गई थी। इस पाषाण समूह को आज भी देखा जा सकता है।


सतनाम पंत ही नहीं अपितु पुरे छत्तीसगढ़ की धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से गिरौदपुरी धाम विश्व विख्यात हैं। गुरु घासीदास बाबा की इस पावन भूमि में लोग उनके दर्शन मात्र के लिए दूर-दूर से देखने के लिए आते हैं। लेकिन कांग्रेस सरकार में इस क्षेत्र के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य नहीं किया। अब कांग्रेस सरकार के पूरे साढ़े चार साल गुजर गए तो प्रदेश में जैतखंभ बनाने का निर्णय लेकर वोट बैंक की राजनीति की जा रही है।

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