ख़ैरागढ़ 00 शहर के बाहर से बन रहे बायपास निर्धारित समयसीमा खत्म होने के बाद भी अब तक मूर्त रूप नहीं ले पाई है। सेतु निगम अब तक बाइपास में पुल का निर्माण नहीं कर पाई है। जिसकी वजह से बाईपास में आवागमन शुरू नहीं हो पाया है। 13 साल बाद भी बाइपास का काम पूरा न हो पाना न केवल प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है बल्कि निर्माण एजेंसी के लापरवाहीपूर्ण रवैये को भी प्रदर्शित करता है। शहर में बढ़ते आवागमन और ट्रैफिक समस्या के बाद समयसीमा की बैठक में कलेक्टर डॉ.जगदीश सोनकर ने शहर के भीतर भारी वाहनों के घुसने पर सुबह से शाम तक प्रतिबंध लगाए जाने और नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्यवाही के निर्देश एसडीएम को दिए हैं। ऐसे में एक मात्र स्टेट हाइवे के भरोसे शहर में आवागमन हो पाता है। भारी वाहनों को रोके जाने से हाइवे की व्यवस्था चरमरा जाएगी। वाहनों को शहर के बाहर घंटों रोकना भी प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी।
नहीं है कोई और रास्ता
शहर के मध्य से गुजरने वाले एक ही स्टेट हाइवे राजनांदगांव कवर्धा मार्ग से ही मुख्य आवागमन होता है। इस हाइवे के अलावा शहर के आऊटरों में ऐसे मार्ग नहीं है जहां से शहर के भीतर घुसने वाले भारी वाहनों को डायवर्ट किया जा सके। राजनांदगांव-कवर्धा मार्ग शहर के भीतर से गुजरता है। कवर्धा रूट से राजनांदगांव डोंगरगढ़, धमधा, दुर्ग जाने के लिए शहर के भीतर से ही गुजर कर जाना पड़ता है। राजनांदगांव जाने कोई वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं बन पाई है। डोंगरगढ़,दुर्ग जाने के लिए भी शहर के भीतर से ही जाना पड़ता है।
आवागमन के लिए शहर में घुसना ज़रुरी
नागपुर, डोंगरगढ़ की ओर से आने वाले भारी वाहन रायपुर जाने खैरागढ़ शहर में घुसकर धमधा मार्ग पकड़ते हैं। इन वाहनों के लिए भी शहर के बाहर से जाने वैकल्पिक मार्ग नहीं है। ऐसे में भारी वाहनों के शहर प्रवेश पर प्रतिबंध के चलते वाहनों को शहर के बाहर दिनभर खड़ा करना पडे़गा।
बाईपास पूरा होता तो मिलती राहत
शहर में भारी वाहनों की आवाजाही रोकने आवागमन को दुरुस्त करने 2018 में तैयार होने वाली बायपास सड़क अब तक पूरी नही हो पाई है। छह किमी बायपास सड़क से राजनांदगांव कवर्धा मार्ग को बाहर से ही जोड़ता है। लोनिवि द्वारा सड़का का निर्माण कार्य पूरा करा लिया गया है। लेकिन बायपास सड़क पर बन रहे तीन उच्च स्तरीय पुलों का कार्य अब तक पूर्ण नहीं हो पाया है। इसमें से एक आमनेर नदी पर बन रहे पुल के निर्माण की मियाद भी खत्म हो चुकी है। सेतू निगम द्वारा कराए जा रहे पुल निर्माण के कार्य औसत से भी धीमें चल रहे हैं। इसका खामियाजा आवाजाही करने वालों को उठाना पड़ रहा है।