देर शाम सभी किसानों को मिलने बुलाया भीतर
ख़ैरागढ़ 00 ओला वृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग को लेकर मंगलवार को कलेक्टर से मिलने पहुंचें किसानों को कलेक्टर की बेरुखी का सामना करना पड़ा। हालांकि देर शाम कलेक्टर डॉ. जगदीश सोनकर ने सभी किसानों को भीतर मिलने बुलाया। और उनकी बात सुनी। भाजपा किसान मोर्चा महामंत्री खम्मन ताम्रकार के नेतृत्व में पहुंचे किसान घंटों कलेक्टर कार्यालय के सामने बैठे रहे। लेकिन कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो पाई। किसान कलेक्टर के बाहर आने की मांग करते रहे लेकिन कलेक्टर डॉ.जगदीश सोनकर बाहर नहीं आए। इस दौरान सांसद प्रतिनिधि राकेश गुप्ता,जिला उपाध्यक्ष राकेश ताम्रकार,विकेश गुप्ता,अनिल अग्रवाल,प्रकाश सिंह ठाकुर,चंद्रशेखर यादव,दुजे राम वर्मा,लीमेश्वरी साहू,हेमू साहू,भरत वर्मा,अनुज साहू,दिवाकर सोनी,हर्ष वर्धन वर्मा,सुखराम वर्मा,भीषम वर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
किसान हित की बात बेमानी - खम्मन
किसानों को संबोधित करते हुए खम्मन ताम्रकार ने कहा कि ये दुर्भाग्य जनक है कि जिन किसानों की सुनवाई के लिए कलेक्टर को बैठाया गया है। वो कलेक्टर किसानों से मिलने के लिए तैयार ही नहीं हुआ। खम्मन ने कहा कि जब शासन के नुमाइंदे ही किसानों का आवेदन लेने के लिए तैयार नहीं हो रहे है तो किसान हित की बात करना बेमानी है। एक तरफ कांग्रेस सरकार किसानों के हित की बात करती है दूसरी ओर किसानों से मिलने के लिए कलेक्टर के पास मिलने का समय ही नहीं है।
लगाए ये आरोप
खम्मन सहित किसानों ने आरोप लगाया कि ओला वृष्टि का सर्वे बनाने के लिए पटवारी पैसे मांगते हैं। और तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी पैसे की मांग करते हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि एसडीएम गंडई के पास भी इसी तरह से किसानों से मिलने का समय नहीं है। अवैध शराब बिक्री के मामले में भी इसी तरह से एसडीएम ने भी इसी तरह का रूख़ दिखाया था।
खूब सुनाई खरी - खरी
नाराज़ किसानों ने गेट पर ही गंडई एसडीएम,ख़ैरागढ़ एसडीएम सहित अन्य प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को खूब खरी खरी सुनाई। किसान अंत तक गेट के सामने डटे रहे। हालांकि कलेक्टर सोनकर से मिलने के लिए 10 से 20 किसानों को भीतर आमंत्रित किया गया। लेकिन किसान अपनी मांग पर डटे रहे।
कलेक्टर से मिलकर की मांग
देर शाम कलेक्टर डॉ.सोनकर से मिलकर किसानों ने अपनी बात रखी और किसानों की ओर से खम्मन ताम्रकार ने कहा कि गंडई क्षेत्र में किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। और ज्यादातर समस्याओं के दोषी वर्तमान में गंडई में पदस्थ एसडीएम हैं। ऐसे ओलावृष्टि प्रकरण की जांच व सर्वे का कार्य गंडई एसडीएम के मार्गदर्शन में न कराया जाए।