ख़ैरागढ़. प्रशासनिक जांच ने श्री राम मंदिर बर्फ़ानी धाम के मामले को सुलझाने के बजाय उलझा दिया। शिकायत कर्ता विधायक देवव्रत सिंह ने ट्रस्ट को फ़र्ज़ी बताकर इसे शासनाधीन करने की मांग की है। पर जांच की दिशा ही कुछ अलग है। प्रशासनिक अमला फिलहाल स्थावर सम्पत्तियों की जांच में लगा हुआ है। दो दिन पहले मंदिर के तीनों खसरों की जांच की गई। मौके पर तहसीलदार प्रीतम साहू,आर आई और पटवारी सहित विधायक देवव्रत सिंह के प्रतिनिधि के रूप में लाल अशोक सिंह सहित वार्डवासी मौजूद रहे। ज़मीनों के नाप का फिलहाल प्रतिवेदन सामने आना बाकी है। पर नाप के दौरान कुछ ज़मीन ट्रस्ट के नाम पर,कुछ ज़मीन सर्वराकार कलेक्टर के नाम पर दर्ज पाई गई। और उसी के आधार पर सीमांकन किया गया। पर इस मामले में भी ट्रस्ट का अपना अलग पक्ष है। और उन्होंने ने नज़ूल ज़मीनों के सम्बन्धित मैटेननेस खसरे की छायाप्रति तहसीलदार और आर आई को सौंपी है। जिसमें ज़मीने ट्रस्ट समिति के नाम पर दर्ज है। अब प्रशासन ने सभी का बयान लेने की बात कही है,पर नोटिस किसी भी पक्ष को जारी नहीं किया है।
मामले को ऐसे समझिए ....
00 श्री बर्फ़ानी बाबा ने श्री राम मंदिर में साल 2017 में ट्रस्ट का गठन किया । और अपने शिष्यों को समिति का सदस्य बनाया।
00 बर्फ़ानी बाबा के समाधिस्थ होने के बाद विधायक देवव्रत सिंह ने सबसे पहले ट्रस्ट को फ़र्ज़ी बताकर इसके शासकीय करण की मांग की।
00 फिर देवव्रत सिंह के प्रतिनिधि लाल अशोक सिंह सामने आए,और उनके पुत्र कांग्रेस नेता आकाशदीप सिंह ' गोल्डी ' ने स्थानीय लोगों के प्रतिनिधि की कमान संभाली।
00 इसके बाद मामले में अप्रत्याशित रूप से एंट्री हुई अमरकंटक निवासी लक्ष्मण दास की। जिन्होंने खुद को गादिपति बताते हुए बर्फ़ानी बाबा के मुख्य कक्ष में कब्ज़ा किया हुआ है। साथ में बालक दास और बिहारी दास भी हैं।
00 लक्ष्मण दास के समर्थन में स्थानीय लोगों की एंट्री हुई और उनके प्रतिनिधि के रूप में भाजपा नेता राजू यदु सामने आए।
किसने - किसने दिया आवेदन ...
00 विधायक ने ट्रस्ट के विरुद्ध कलेक्टर को आवेदन दिया।
00 लक्ष्मण दास ने ट्रस्ट के विरुद्ध आवेदन दिया।
00 ट्रस्ट ने लक्ष्मण दास के विरुद्ध आवेदन दिया।
00 स्थानीय लोगों ने जन मुद्दों के निराकरण के लिए आवेदन दिया।
क्या है स्थावर सम्पत्ति की स्थिति :-
00 खसरा नं . 1077,अकरजन खार में स्थित है,जिसका क्षेत्रफल 1.0640 हेक्टयर है। और भूमि श्री रामचंद्र जी मंदिर पिता सर्वराकार श्री श्री 108 श्री बर्फ़ानी दादा जी का नाम दर्ज है।
00 मेन्टेनेन्स खसरे में मंदिर की जगह वाली प्लॉट क्रमांक - 351,क्षेत्रफल 5550 वर्ग फ़ीट भूमि,मंदिर श्री रामचंद्र जी सर्वराकार योगिराज टेम्पल कमिटी श्री अर्जुन दास अमरकंटक वाले के नाम पर दर्ज है।
00 वही आश्रम के स्थल वाली प्लाट नं.350,क्षेत्रफल 60475 वर्ग फ़ीट भूमि,सर्वराकार योगिराज बर्फ़ानी दादा गुरु श्री अर्जुन दास अमरकंटक वाले के नाम पर दर्ज है।
क्या होना चाहिए जांच के बिंदु : -
00 ट्रस्ट फ़र्ज़ी है या नहीं ?
00 पंजीयन के दस्तावेज असली है या नहीं ?
00 पंजीयन विधि अनुसार है या नहीं ?
00 लक्ष्मण दास उत्तराधिकारी है या नहीं ?
00 आय - व्यय में गड़बड़ी है या नहीं ?
00 सम्पत्ति का नामांतरण वैध है या अवैध ?
प्रशासन इन बिंदुओं पर कर रही जांच
प्रशासन सम्पत्ति का नाप करा रही है,जबकि कब्ज़ा जानने के लिए स्थावर सम्पत्ति की जांच की आवश्यकता ही नहीं है। क्योंकि कब्ज़ा मुख्य रूप से दस्तावेजों के अवलोकन से ही जाना जा सकता है। शिकायत करता देवव्रत सिंह ने ट्रस्ट को ही फ़र्ज़ी बताया है। ऐसे में पंजीयन प्रक्रियाओं की जांच करने के बजाय प्रशासन ज़मीनों के नाप जोक की प्रक्रिया अपना रही है।
जांच या खानापूर्ति ?
00 ट्रस्टियों को नोटिस नहीं !
00 न ही बयान देने वालों को नोटिस !
00 शिकायत कर्ताओं का भी लिखित बयान दर्ज नहीं !
00 कब्ज़े को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं !
क्या कहते हैं पक्षकार : -
कांग्रेस नेता आकाशदीप सिंह गोल्डी का कहना है कि मंदिर के सर्वराकार कलेक्टर हैं। जांच में नजूल ज़मीन भी निकली है। अभी बयान दर्ज होना है। भाजपा नेता राजू यदु ने कहा कि प्रशासन को स्थायी समाधान निकालना चाहिए। स्थानीय लोगों को मंदिर के संचालन में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। ट्रस्ट के अध्यक्ष राकेश बहादुर सिंह ने बताया कि हमने सम्पत्ति,आय - व्यय से जुड़े सभी दस्तावेज तहसीलदार को सौंप दिए हैं। हम नियमानुसार काबिज़ हैं।
चल रही है प्रक्रिया
तहँसीलदार प्रीतम साहू ने बताया कि नियमानुसार जांच की जा रही है। ज़मीन का सीमांकन किया गया है। बाकी प्रक्रिया भी चल रही है।