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सुराजी योजना से हुआ 1 लाख 10 हजार  रुपय का हुआ लाभ Featured

खैरागढ़ 00 जिले में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर जहां खुद की आर्थिक स्थिति को सुधारने में जुटी हैं तो वही दूसरों को स्वरोजगार के लिए आईना भी दिखा रही हैं। ये महिलाएं जिले में जहां एक ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बना रही है वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तीकरण की नई नई इबारत लिख रही हैं। इसी कड़ी में विकासखण्ड छुईखदान के ग्राम मानपुर पहाडी की शाकम्बरी स्व सहायता समुह  की महिलाएं शासन की महत्वाकांक्षी योजना ’’सुराजी ग्राम योजनान्तर्गत’’ ग्राम में स्थापित आदर्श गौठान में ’’नरवा, गरवा, घुरवा, बारी ऐला बचाना है संगवारी’’ इन पंक्तियों को चरितार्थ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इनके द्वारा अब तक कुल 105.20 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा चुका है। जिसमें से 82 हजार रूपये के  खाद का विक्रय व 97 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट का उत्पादन अब तक कर चुके है। 


शाकम्बरी स्व सहायता समुह  की महिलाओं ने  51 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट पर 30 हजार 600 रुपय की राशि अर्जित कर स्वयं के लिए अतिरिक्त आय का सृजन किया है जिससे इन्हे लगभग 1 लाख 10 हजार रुपय का लाभ हुआ है। समूह की महिलाओं ने बताया कि समूह गठन के कुछ माह बाद हम सब स्वरोजगार से जुड़ने के बारे में सोचे तो घरवालों ने भी हमारा हौसला बढ़ाया था सहयोग किए।


आजीविकामूलक गतिविधि पर जोर


जिले के सभी ग्राम पंचायतों में शत प्रतिशत गोठान के निर्माण की दिशा में तेजी से कार्य किये जा रहे हैं। जिला कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने गोधन न्याय योजना के तहत सभी गोठानों में गोबर खरीदी के निर्देश दिए हैं। जिले के गोठानों में आजीविकामूलक गतिविधि संचालित होने से समूह की महिलाओं में उत्साह एवं खुशी है। वर्मी कंपोस्ट निर्माण, सामुदायिक बाड़ी, मत्स्य पालन, मुर्गीपालन, बटेरपालन, बकरीपालन, मशरूम उत्पादन, अगरबत्ती, चंदन निर्माण, पापड़, बड़ी, आचार सहित विभिन्ना उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है।


इस प्रकार शासन की महत्वाकांक्षी ग्राम सुराजी योजना ग्रामीण परिवेश में निवासरत स्व सहायता समूह की महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है । शासन की योजना से उन्हें आर्थिक लाभ हुआ है जिसके लिए वो माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देती है, जिनके कारण वे आज गौठान से रोजगार और आय प्राप्त करके आत्मनिर्भर बन पाई है।

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