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दीक्षा से पहली बेटी हनी को नगर ने सर आंखों पर बिठाया,निकाली गई भव्य शोभायात्रा Featured

 
ख़ैरागढ़. दीक्षा से पहले शनिवार को संगीत नगरी खैरागढ़ के प्रतिष्ठित चोपड़ा परिवार की लाडली बेटी हनी चोपड़ा ने नगर भ्रमण किया। जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। संयम मार्ग में आगे बढ़ने से पहले सांसारिक जीवन में उनके त्याग पर नगर ने भाव विभोर करने वाली आत्मीयता लुटाई। शोभायात्रा का नगर में जगह जगह स्वागत हुआ। आगामी 24 फरवरी को महाराष्ट्र के मालेगांव में संयम मार्ग का अनुशरण कर दीक्षा लेगी। दीक्षा अभिनंदन महोत्सव को लेकर सकल जैन श्रीसंघ संघ के अध्यक्ष कमलेश गिड़िया व कार्यक्रम का संयोजन कर रहे समाजसेवी गुलाब छाजेड़ ने बताया कि दीक्षा अभिनंदन महोत्सव को लेकर 8 दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई। 5 फरवरी से कुंकुम के साथ महोत्सव की शुरूआत की गई।
 
मुख्य मार्ग से निकली शोभा यात्रा
 
मुख्य आयोजन आगामी 12 फरवरी शनिवार को प्रातः 9:10 बजे से प्रारंभ हुआ। दीक्षा वरघोड़ा का आयोजन संपन्न हुआ। महावीर भवन मुख्य मार्ग से अभिनंदन प्रांगण तक नगर के मुख्य मार्गों से शोभा यात्रा निकाली गई । तदोपरांत 21 फरवरी को दोपहर 2 बजे डोरा बन्धन व हाथकाम की रश्म अदायगी के बाद 22 फरवरी को 2प्रातः 7:30 बजे से 8ः 30 बजे तक अमलीपारा स्थित निज निवास में मुमुक्षु बहन की विदाई व लापसी लूट का आयोजन होगा । 
 
 
छात्र जीवन से किया संयम मार्ग का अनुशरण
 
जिन शासन का अनुशरण करने वाली मुमुक्षु बहन हनी चोपड़ा ने बताया कि छात्र जीवन से ही वह संयम मार्ग का अनुशरण करती रही है । धर्म में प्रारंभ से रूचि थी। लेकिन मेधावी छात्रा के रूप में भी विख्यात रही मुमुक्षु बहन अध्ययन के क्षेत्र में रत रही , परिवार में प्रारंभ से ही धार्मिक संस्कार व प्रवृत्तियों के कारण बचपन से साधु - संतों का सानिध्य मिलता रहा । 
 
श्रीजी मसा से मिली प्रेरणा
 
सालभर पूर्व खैरागढ़ पधारी परम पू य मंजू श्रीजी मसा के पावन सानिध्य में आने सेमुमुक्षु बहन हनी चोपड़ा को दीक्षा की प्रेरणा मिली । उन्होंने बताया कि पिता गैंदमल चोपड़ा व माता शकुन चोपड़ा से संयम साधना की अनुमति प्राप्त कर प.पू. गुरूदेव समरथग छाधिपति वात्सल्य मूर्ति 1008 श्री उत्तमचंद जी म.सा. पू य रोशनचंद जी म.सा. व प.पू. विदुषी महासती 1005 श्री विमल कुंवर जी म . सा . तथा प.पू. मंजू श्री जी म.सा. की प्रेरणा से दीक्षा का मन बनाया . परिवार में पहले ही तीन बुआ म . सा . दीक्षा ले चुकी हैं . यह चोपड़ा परिवार से चौथी दीक्षा होगी वहीं नगर से 10 वीं दीक्षा . संयम मार्ग के अनुशरण को लेकर मुमुक्षु बहन ने बताया कि प.पू. मंजू श्री जी म.सा. के पावन सानिध्य में यह आत्मचेतना मिली कि जिन शासनक्या है । जीवन में संसार व संयम दो ही चीजें हैं । अपनी आत्मा को जानना ही साधु मार्ग है । भगवान महावीर स्वामी का मार्ग ही ऐसा है कि हम पूरे संसार को धर्म से जोड़ सकते हैं । उन्होंने कहा कि जिस मार्ग में भगवान महावीर चले , जिस मार्ग में पू य चंदन माला चली उस मार्ग में मुझे चलने का सौभाग्य मिल रहा यह मेरे लिये गौरव की बात है ।. मैं जिन शासन व संयम मार्ग का अनुशरण करती रहूं व संसार को स चे धर्म से जोड़ सकूं यही मेरा उद्देश्य होगा। 
 
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