ख़ैरागढ़ 00 न्यायधीश चन्द्र कुमार कश्यप की नाबालिग से अनाचार के मामले में आरोपी रजेलाल मेरावी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साल्हेवारा थानांतर्गत सिंगबोरा के निवासी रजेलाल को अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। मामले में दिनांक 13 नवंबर 2021 को 12.30 बजे पीड़िता के पिता ने थाना साल्हेवारा में लिखित शिकायत दर्ज कराया। जिसमें उसने बताया कि 11 नवंबर 2021 की रात्रि 8. 30 बजे वह खाना खाकर सो गया था। उसकी बेटी घर के सामने खेल रही थी, जब वह सोकर उठा तो उसकी पत्नी ने उसे बताया कि बेटी घर पर नहीं है, तब वे लोग बेटी को गॉव व घर के आसपास ढूंढने लगे। इसी दौरान रोने की आवाज आने पर आरोपी के घर के अंदर गये जहां बेटी डरी हुई व रोती बिलखते हुए बैठी थी, तब उसके माता पिता ने अपनी पुत्री से कारण पूछा तो उसने बताया कि, रात्रि 9.00 बजे वह अपने मौसी के घर जा रही थी, तभी आरोपी ने पकडकर, गमच्छा से उसका मुंह बंद कर दिया और चिल्लाने पर जान से मारने की धमकी देते हुए अपने घर ले गया। जबरदस्ती उसके साथ बलात्कार किया,उपरांत कुछ समय बाद दोबारा बलात्कार किया। वह डर के कारण किसी को चिल्लाकर नहीं बता पायी जिसकी सूचना गांव के लोगों को बताया गया । पीड़िता के पिता की उक्त लिखित शिकायत के आधार पर आरोपी के विरूद्ध 376 (2) (ढ) 506, 342 भारतीय दण्ड संहिता एवं धारा 4, 5 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान पीड़िता का कथन दर्ज कर उसका मेडिकल मुलाहिजा कराया गया।
समाज के लिए घातक है आरोपी का कृत्य
प्रकरण की सुनवाई में न्यायधीश ने कहा कि आरोपी के किए गए कृत्य को अत्यंत गंभीर प्रकृति का होकर समाज के लिए घातक है, यौन हिंसा गैर-मानवीय कार्य होने के अतिरिक्त किसी बालक या स्त्री के पवित्रता एवं निजता के अधिकार पर हमला है। यह उसकी प्रतिष्ठा पर कुठाराघात है। जिससे उसकी गरिमा एवं मर्यादा को चोंट पहुंचती है साथ ही उसके मन-मस्तिष्क में अत्यंत गहरा एवं बुरा अनुभव छोड जाता है ।
स्वीकार्य नहीं ऐसी घटनाएं
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि सभ्य समाज में ऐसी घटनायें किसी भी प्रकार से स्वीकार्य योग्य नहीं है। आज के विकसीत समाज में आए दिन बालकों के प्रति घटित होने वाली लैंगिक अपराध की घटना सभ्य समाज के लिए कलंककारी है, ऐसे गंभीर अपराध में आरोपी किसी प्रकार से सहानुभूति प्राप्त करने या दूसरे शब्दों में दण्ड के प्रति नरमी से विचार किए जाने योग्य नहीं है। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक अलताफ अली खैरागढ़ ने शासन की ओर से पैरवी की है व उक्ताशय में यह जानकारी दी ।